Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.180.6: सर्प बोला - हे राजन! यह राजकुमार स्वयं मेरे मुख में आकर मेरा आहार बन गया है। आप जाइए, यहाँ रुकना उचित नहीं है; अन्यथा कल तक आप भी मेरा आहार बन जाएँगे। | mahabharat अध्याय 3.180: युधिष्ठिरका भीमसेनके पास पहुँचना और सर्परूपधारी नहुषके प्रश्नोंका उत्तर देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्प बोला - हे राजन! यह राजकुमार स्वयं मेरे मुख में आकर मेरा आहार बन गया है। आप जाइए, यहाँ रुकना उचित नहीं है; अन्यथा कल तक आप भी मेरा आहार बन जाएँगे।
The snake said - O King! This prince has come to my mouth himself and has come to me as food. You go, it is not right to stay here; otherwise by tomorrow you too will become my food.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥