Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.180.5: तब युधिष्ठिर ने सर्प से कहा - हे आयुष्मान्! कृपया मेरे इस वीर भाई को छोड़ दीजिए। हम आपकी भूख मिटाने के लिए कुछ और भोजन दे देंगे।   |   mahabharat अध्याय 3.180: युधिष्ठिरका भीमसेनके पास पहुँचना और सर्परूपधारी नहुषके प्रश्नोंका उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 180: युधिष्ठिरका भीमसेनके पास पहुँचना और सर्परूपधारी नहुषके प्रश्नोंका उत्तर देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.180.5 
युधिष्ठिर उवाच
मुच्यतामयमायुष्मन् भ्राता मेऽमितविक्रम:।
वयमाहारमन्यं ते दास्याम: क्षुन्निवारणम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तब युधिष्ठिर ने सर्प से कहा - हे आयुष्मान्! कृपया मेरे इस वीर भाई को छोड़ दीजिए। हम आपकी भूख मिटाने के लिए कुछ और भोजन दे देंगे।
 
Then Yudhishthira said to the snake - O Ayushman! Please leave this valiant brother of mine. We will give you some other food to satiate your hunger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)