Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.180.38: सर्प ने कहा—युधिष्ठिर! आप जानने योग्य सब कुछ जानते हैं। मैंने आपकी बात भली-भाँति सुन ली है। अब मैं आपके भाई भीमसेन को कैसे खा सकता हूँ?॥ 38॥ | mahabharat अध्याय 3.180: युधिष्ठिरका भीमसेनके पास पहुँचना और सर्परूपधारी नहुषके प्रश्नोंका उत्तर देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्प ने कहा—युधिष्ठिर! आप जानने योग्य सब कुछ जानते हैं। मैंने आपकी बात भली-भाँति सुन ली है। अब मैं आपके भाई भीमसेन को कैसे खा सकता हूँ?॥ 38॥
The snake said—Yudhishthira! You know everything that is worth knowing. I have listened to you very well. Now how can I eat your brother Bhimasena?॥ 38॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि आजगरपर्वणि युधिष्ठिरसर्पसंवादे अशीत्यधिकशततमोऽयाय:॥ १८०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत आजगरपर्वमें युधिष्ठिरसर्पसंवादविषयक
एक सौ अस्सीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥