Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.180.27-29: अब आपने कहा है कि सुख-दुःख से रहित कोई अन्य वैद्य तत्त्व नहीं है, अतः आपका मत ठीक है। ऐसा कोई पदार्थ नहीं है जो सुख-दुःख से रहित हो। परन्तु एक ऐसा पद है। जैसे बर्फ में गर्मी नहीं होती और अग्नि में शीतलता नहीं होती, उसी प्रकार वैद्य पद भी वस्तुतः सुख-दुःख से रहित है। नागराज! यह मेरा मत है, फिर आप जैसा चाहें वैसा मान सकते हैं॥ 27-29॥ | mahabharat अध्याय 3.180: युधिष्ठिरका भीमसेनके पास पहुँचना और सर्परूपधारी नहुषके प्रश्नोंका उत्तर देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यत् पुनर्भवता प्रोक्तं न वेद्यं विद्यतीति च।
ताभ्यां हीनमतोऽन्यत्र पदमस्तीति चेदपि॥ २७॥
एवमेतन्मतं सर्प ताभ्यां हीनं न विद्यते।
यथा शीतोष्णयोर्मध्ये भवेन्नोष्णं न शीतता॥ २८॥
एवं वै सुखदु:खाभ्यां हीनमस्ति पदं क्वचित्।
एषा मम मति: सर्प यथा वा मन्यते भवान्॥ २९॥
अनुवाद
अब आपने कहा है कि सुख-दुःख से रहित कोई अन्य वैद्य तत्त्व नहीं है, अतः आपका मत ठीक है। ऐसा कोई पदार्थ नहीं है जो सुख-दुःख से रहित हो। परन्तु एक ऐसा पद है। जैसे बर्फ में गर्मी नहीं होती और अग्नि में शीतलता नहीं होती, उसी प्रकार वैद्य पद भी वस्तुतः सुख-दुःख से रहित है। नागराज! यह मेरा मत है, फिर आप जैसा चाहें वैसा मान सकते हैं॥ 27-29॥
Now you have said that there is no other Vaidya element which is devoid of happiness and sorrow, so your opinion is correct. There is no substance which is devoid of happiness and sorrow. But there is such a position. Just as there is no heat in ice and no coldness in fire, in the same way the Vaidya position is actually devoid of happiness and sorrow. Nagaraj! This is my opinion, then you may believe as you wish.॥ 27-29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥