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mahabharat 3.180.23: सर्प ने कहा- युधिष्ठिर! सच्चा और प्रामाणिक ब्रह्म चारों वर्णों के लिए कल्याणकारी है। सत्य, दान, अक्रोध, क्रूरता का अभाव, अहिंसा और दया आदि सद्गुण शूद्रों में भी विद्यमान हैं। 23॥   |   mahabharat अध्याय 3.180: युधिष्ठिरका भीमसेनके पास पहुँचना और सर्परूपधारी नहुषके प्रश्नोंका उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 180: युधिष्ठिरका भीमसेनके पास पहुँचना और सर्परूपधारी नहुषके प्रश्नोंका उत्तर देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.180.23 
सर्प उवाच
चातुर्वर्ण्यं प्रमाणं च सत्यं च ब्रह्म चैव हि।
शूद्रेष्वपि च सत्यं च दानमक्रोध एव च।
आनृशंस्यमहिंसा च घृणा चैव युधिष्ठिर॥ २३॥
 
 
अनुवाद
सर्प ने कहा- युधिष्ठिर! सच्चा और प्रामाणिक ब्रह्म चारों वर्णों के लिए कल्याणकारी है। सत्य, दान, अक्रोध, क्रूरता का अभाव, अहिंसा और दया आदि सद्गुण शूद्रों में भी विद्यमान हैं। 23॥
 
The snake said- Yudhishthir! The true and authentic Brahman is beneficial for all four varnas. The virtues like truth, charity, anger, absence of cruelty, non-violence and kindness etc. are present even in Shudras. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)