Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.180.21: युधिष्ठिर बोले - सर्पराज! जो सत्य, दान, क्षमा, सदाचार, निर्दयता, तप और दया - इन सद्गुणों को प्रकट करता है, उसे ब्राह्मण कहते हैं। | mahabharat अध्याय 3.180: युधिष्ठिरका भीमसेनके पास पहुँचना और सर्परूपधारी नहुषके प्रश्नोंका उत्तर देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
सत्यं दानं क्षमा शीलमानृशंस्यं तपो घृणा।
दृश्यन्ते यत्र नागेन्द्र स ब्राह्मण इति स्मृत:॥ २१॥
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - सर्पराज! जो सत्य, दान, क्षमा, सदाचार, निर्दयता, तप और दया - इन सद्गुणों को प्रकट करता है, उसे ब्राह्मण कहते हैं।
Yudhishthira said - King of Snakes! The one who shows these good qualities - truth, charity, forgiveness, good behaviour, absence of cruelty, austerity and mercy - is called a Brahmin.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥