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सौतिरुवाच
जानार्दने न मे मोहो नापि मां भयमाविशत्।
अतिभारं तु ते मन्ये शाल्वं केशवनन्दन॥ ७॥
अनुवाद
सारथिपुत्र ने कहा, "हे जनार्दन! न तो मैं मोहित हूँ और न ही मेरे मन में कोई भय है। हे केशवनपुत्र! मुझे ऐसा लगता है कि यह राजा शाल्व आपके लिए बहुत बड़ा भार बन रहा है।"
The son of a charioteer said, "O son of Janardan, neither am I infatuated nor is there any fear in my mind. O son of Kesavan, I feel that this King Shalva is becoming a great burden for you. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥