श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 18: मूर्च्छावस्थामें सारथिके द्वारा रणभूमिसे बाहर लाये जानेपर प्रद्युम्नका अनुताप और इसके लिये सारथिको उपालम्भ देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.18.26 
स च सम्भावयन् मां वै निवृत्तो हृदिकात्मज:।
तं समेत्य रणं त्यक्त्वा किं वक्ष्यामि महारथम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'कृतवर्मा ने मुझे इस कार्य के योग्य जानकर युद्ध से संन्यास ले लिया। आज जब मैं युद्ध छोड़कर उन महारथियों से मिलूँगा, तो उन्हें क्या उत्तर दूँगा?॥ 26॥
 
'Kritavarma, knowing that I am capable of this task, retired from the battle. Today, when I leave the battle and meet those mighty warriors, what answer will I give them?॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)