श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 18: मूर्च्छावस्थामें सारथिके द्वारा रणभूमिसे बाहर लाये जानेपर प्रद्युम्नका अनुताप और इसके लिये सारथिको उपालम्भ देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.18.20 
चारुदेष्णश्च दुर्धर्षस्तथैव गदसारणौ।
अक्रूरश्च महाबाहु: किं मां वक्ष्यति सारथे॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'सारथी! वीर चारुदेष्ण, गद, सारण और पराक्रमी अक्रूर मुझसे क्या कहेंगे?' 20॥
 
'Charioteer! What will the brave Charudeshna, Gad, Saran and mighty Akrura say to me? 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)