श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 18: मूर्च्छावस्थामें सारथिके द्वारा रणभूमिसे बाहर लाये जानेपर प्रद्युम्नका अनुताप और इसके लिये सारथिको उपालम्भ देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.18.2 
हाहाकृतमभूत् सर्वं वृष्ण्यन्धकबलं तत:।
प्रद्युम्ने मोहिते राजन् परे च मुदिता भृशम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजा! प्रद्युम्न के मोहित हो जाने पर वृष्णि और अंधक वंश की सम्पूर्ण सेना में हाहाकार मच गया और शत्रु हर्ष से भर गए॥2॥
 
King! When Pradyumna was captivated, the entire army of the Vrishni and Andhaka clans was in an uproar and the enemies were filled with joy.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)