श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 18: मूर्च्छावस्थामें सारथिके द्वारा रणभूमिसे बाहर लाये जानेपर प्रद्युम्नका अनुताप और इसके लिये सारथिको उपालम्भ देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.18.17 
अपयातं हतं पृष्ठे भ्रान्तं रणपलायितम्।
गदाग्रजो दुराधर्ष: किं मां वक्ष्यति माधव:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब मैं युद्ध से लौट रहा हूँ या भ्रमित होकर भाग रहा हूँ और शत्रुओं के बाणों से मेरी पीठ में चोट लग रही है, तब मेरे पिता, अजेय भगवान माधव, मुझसे क्या कहेंगे?॥17॥
 
'When I am returning from a battle or running away confusedly and am struck in the back by the enemy's arrows, what will my father, the invincible Lord Madhava, say to me then?॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)