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mahabharat 3.18.14: इसी प्रकार जो पुरुष स्त्री, बालक, वृद्ध, रथहीन, पक्ष से अलग हुए तथा नष्ट हो चुके शस्त्रधारी पर शस्त्र उठाता है, वह भी वृष्णि कुल में उत्पन्न नहीं होता॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.18: मूर्च्छावस्थामें सारथिके द्वारा रणभूमिसे बाहर लाये जानेपर प्रद्युम्नका अनुताप और इसके लिये सारथिको उपालम्भ देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 18: मूर्च्छावस्थामें सारथिके द्वारा रणभूमिसे बाहर लाये जानेपर प्रद्युम्नका अनुताप और इसके लिये सारथिको उपालम्भ देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.18.14 
तथा स्त्रियं च यो हन्ति बालं वृद्धं तथैव च।
विरथं विप्रकीर्णं च भग्नशस्त्रायुधं तथा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार जो पुरुष स्त्री, बालक, वृद्ध, रथहीन, पक्ष से अलग हुए तथा नष्ट हो चुके शस्त्रधारी पर शस्त्र उठाता है, वह भी वृष्णि कुल में उत्पन्न नहीं होता॥14॥
 
'Likewise, a person who takes up arms against a woman, a child, an aged person, one without a chariot, one separated from his side and one whose weapons have been destroyed, is also not born in the Vrishni clan.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)