श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 18: मूर्च्छावस्थामें सारथिके द्वारा रणभूमिसे बाहर लाये जानेपर प्रद्युम्नका अनुताप और इसके लिये सारथिको उपालम्भ देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.18.13 
न स वृष्णिकुले जातो यो वै त्यजति संगरम्।
यो वा निपतितं हन्ति तवास्मीति च वादिनम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वृष्णि कुल में ऐसा कोई (वीर पुरुष) उत्पन्न नहीं हुआ जो युद्ध से भाग जाए अथवा गिरे हुए मनुष्य को मार डाले और जो कहता है, 'मैं तुम्हारा हूँ'॥13॥
 
'No such (valiant man) has been born in the Vrishni clan who would flee from the battle or would kill a fallen person and the one who says, "I am yours".॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)