श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 18: मूर्च्छावस्थामें सारथिके द्वारा रणभूमिसे बाहर लाये जानेपर प्रद्युम्नका अनुताप और इसके लिये सारथिको उपालम्भ देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.18.1 
वासुदेव उवाच
शाल्वबाणार्दिते तस्मिन् प्रद्युम्ने बलिनां वरे।
वृष्णयो भग्नसंकल्पा विव्यथु: पृतनागता:॥ १॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं - जब बलवानों में श्रेष्ठ प्रद्युम्न शाल्व के बाणों से घायल हो गए (अचेत हो गए), तब सेना में आए हुए वृष्णिवंशी योद्धाओं का उत्साह भंग हो गया। वे सब बहुत दुःखी हुए॥1॥
 
Lord Krishna says - When Pradyumna, the best amongst the strong, was struck by Shalva's arrows (fell unconscious), the enthusiasm of the Vrishni clan warriors who had come in the army was broken. They all felt very sad.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)