श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.179.8 
वैशम्पायन उवाच
इत्येवंवादिनं वीरं भीममक्लिष्टकारिणम्।
भोगेन महता गृह्य समन्तात् पर्यवेष्टयत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - 'जनमेजय! इस प्रकार बोलने वाले तथा महान पराक्रम दिखाने वाले वीर भीमसेन को उस अजगर ने अनायास ही पकड़ लिया और अपने विशाल शरीर से उन्हें चारों ओर से लपेट लिया।
 
Vaishmpayana says - 'Janamejaya! The python caught hold of the valiant Bhimasena who was speaking like this and who was about to display great valour without any effort, and wrapped him all around with its huge body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)