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श्लोक  3.179.52 
धावतस्तस्य वीरस्य मृगार्थं वातरंहस:।
ऊरुवातविनिर्भग्ना द्रुमा व्यावर्जिता: पथि॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
वायु के समान वेगवान महाबली भीमसेन जब शिकार करने के लिए दौड़ रहे थे, तब उन्होंने मार्ग में अपनी जांघों के प्रहार से टूटे हुए बहुत से वृक्ष देखे।
 
When the mighty Bhimasena, as swift as the wind, was running to hunt, he saw many trees lying broken by the blows of his thighs on the way.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)