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mahabharat 3.179.49: उस महान् वन में भीमसेन के चरणचिह्न देखकर महाबली कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर उस आश्रम से बाहर निकले और सर्वत्र खोज की ॥49॥   |   mahabharat अध्याय 3.179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  3.179.49 
स तस्य पदमुन्नीय तस्मादेवाश्रमात् प्रभु:।
मृगयामास कौन्तेयो भीमसेनं महावने॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
उस महान् वन में भीमसेन के चरणचिह्न देखकर महाबली कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर उस आश्रम से बाहर निकले और सर्वत्र खोज की ॥49॥
 
Seeing the footprints of Bhimsen in that great forest, the mighty Kuntinandan Yudhishthira came out of that ashram and searched everywhere. 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)