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mahabharat 3.179.45: उसके हृदय और बायें पैर में पीड़ा होने लगी और बायीं आँख में अशुभ विकार उत्पन्न हो गया ॥45॥   |   mahabharat अध्याय 3.179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.179.45 
हृदयं चरणश्चापि वामोऽस्य परितप्यति।
सव्यस्याक्ष्णो विकारश्चाप्यनिष्ट: समपद्यत॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
उसके हृदय और बायें पैर में पीड़ा होने लगी और बायीं आँख में अशुभ विकार उत्पन्न हो गया ॥45॥
 
He began to have pain in his heart and left leg. An ominous disorder developed in his left eye. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)