vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज
»
श्लोक 45
श्लोक
3.179.45
हृदयं चरणश्चापि वामोऽस्य परितप्यति।
सव्यस्याक्ष्णो विकारश्चाप्यनिष्ट: समपद्यत॥ ४५॥
अनुवाद
उसके हृदय और बायें पैर में पीड़ा होने लगी और बायीं आँख में अशुभ विकार उत्पन्न हो गया ॥45॥
He began to have pain in his heart and left leg. An ominous disorder developed in his left eye. ॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×