श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  3.179.44 
पृष्ठतो वायस: कृष्णो याहि याहीति शंसति।
मुहुर्मुहु: स्फुरति च दक्षिणोऽस्य भुजस्तथा॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
उसके पीछे काला कौआ “जाओ, जाओ” चिल्ला रहा था और उसका दाहिना हाथ बार-बार हिल रहा था।
 
The black crow behind him was calling out “Go, go” and his right arm was twitching repeatedly. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)