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mahabharat 3.179.43: उस समय एक सूखी और तेज हवा चल रही थी, कंकड़ बरसा रही थी और पशु-पक्षियों की सारी आवाजें दाहिनी ओर आ रही थीं।   |   mahabharat अध्याय 3.179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.179.43 
प्रववौ चानिलो रूक्षश्चण्ड: शर्करकर्षण:।
अपसव्यानि सर्वाणि मृगपक्षिरुतानि च॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उस समय एक सूखी और तेज हवा चल रही थी, कंकड़ बरसा रही थी और पशु-पक्षियों की सारी आवाजें दाहिनी ओर आ रही थीं।
 
At that time a dry and strong wind was blowing, showering pebbles and all the sounds of animals and birds were coming towards the right. 43.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)