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श्लोक  3.179.41 
दारुणं ह्यशिवं नादं शिवा दक्षिणत: स्थिता।
दीप्तायां दिशि वित्रस्ता रौति तस्याश्रमस्य ह॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
उनके आश्रम के दक्षिण में, जहाँ अग्नि जल रही थी, एक भयभीत सियार उठ खड़ी हुई और भयंकर विलाप करने लगी। 41.
 
To the south of his hermitage, where the fire was burning, a frightened female jackal stood up and began to utter a terrible wailing cry. 41.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)