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mahabharat 3.179.36: 'भुजंगम्! मेरे मर जाने पर मेरी अनाथ माता की, जो मुझ पर आश्रित थी, समस्त इच्छाएँ कैसे पूरी होंगी?॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 3.179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.179.36 
तस्या: कथं त्वनाथाया मद्विनाशाद् भुजङ्गम।
सफलास्ते भविष्यन्ति मयि सर्वे मनोरथा:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
'भुजंगम्! मेरे मर जाने पर मेरी अनाथ माता की, जो मुझ पर आश्रित थी, समस्त इच्छाएँ कैसे पूरी होंगी?॥ 36॥
 
'Bhujangam! How will all the desires of my orphaned mother, which were dependent on me, be fulfilled if I die?॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)