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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज
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श्लोक 32
श्लोक
3.179.32
अथवा नार्जुनो धीमान् विषादमुपयास्यति।
सर्वास्त्रविदनाधृष्यो देवगन्धर्वराक्षसै:॥ ३२॥
अनुवाद
'अथवा बुद्धिमान अर्जुन दुःखी नहीं होगा, क्योंकि वह सम्पूर्ण अस्त्रों का स्वामी है। देवता, गन्धर्व और राक्षस भी उसे परास्त नहीं कर सकते।॥32॥
‘Or the wise Arjuna will not be sad because he is the master of all the weapons. Even the gods, Gandharvas and demons cannot defeat him.॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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