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mahabharat 3.179.30: 'यक्षों और राक्षसों से भरा हुआ यह हिमालय अत्यंत दुर्गम है। जब मेरे भाई व्याकुल होकर मुझे ढूँढ़ेंगे, तब वे अवश्य ही कहीं खाई में गिर पड़ेंगे ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 3.179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.179.30 
हिमवांश्च सुदुर्गोऽयं यक्षराक्षससंकुल:।
मां समुद्वीक्षमाणास्ते प्रपतिष्यन्ति विह्वला:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
'यक्षों और राक्षसों से भरा हुआ यह हिमालय अत्यंत दुर्गम है। जब मेरे भाई व्याकुल होकर मुझे ढूँढ़ेंगे, तब वे अवश्य ही कहीं खाई में गिर पड़ेंगे ॥30॥
 
'This Himalaya, which is filled with Yakshas and demons, is extremely inaccessible. When my brothers will be anxiously looking for me, they will surely fall into a ditch somewhere. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)