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mahabharat 3.179.26: 'क्योंकि मनुष्य सुख-दुःख को प्राप्त करने या उनसे छुटकारा पाने में कभी असमर्थ होता है और कभी समर्थ। इसलिए किसी भी परिस्थिति में मन में पश्चाताप को प्रवेश नहीं करने देना चाहिए।॥26॥   |   mahabharat अध्याय 3.179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.179.26 
यस्मादभावी भावी वा मनुष्य: सुखदु:खयो:।
आगमे यदि वापाये न तत्र ग्लपयेन्मन:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'क्योंकि मनुष्य सुख-दुःख को प्राप्त करने या उनसे छुटकारा पाने में कभी असमर्थ होता है और कभी समर्थ। इसलिए किसी भी परिस्थिति में मन में पश्चाताप को प्रवेश नहीं करने देना चाहिए।॥26॥
 
'Because man is sometimes incapable and sometimes capable of attaining or getting rid of happiness and sorrow. Therefore, one should not allow remorse to enter one's mind under any circumstances.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)