श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.179.25 
तमुवाच महाबाहुर्भीमसेनो भुजङ्गमम्।
न च कुप्ये महासर्प न चात्मानं विगर्हये॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तब बलवान भीम ने अजगर से कहा - 'हे महासर्प! मैं न तो तुम पर क्रोध कर रहा हूँ और न अपनी ही निन्दा कर रहा हूँ॥ 25॥
 
Then the powerful Bhima said to the python - 'O great serpent! I am neither angry with you nor criticizing myself.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)