श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.179.24 
सोऽहं परमदुष्कर्मा वसामि निरयेऽशुचौ।
सर्पयोनिमिमां प्राप्य कालाकाङ्क्षी महाद्युते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
महाद्युते! मैं अत्यन्त दुष्ट होकर इस अपवित्र नरक में रहता हूँ। इस सर्प योनि में पड़कर मैं इससे मुक्त होने के अवसर की प्रतीक्षा करता हूँ।॥24॥
 
‘Mahadyute! Being a very wicked person, I live in this impure hell. Having fallen into this serpent form, I wait for an opportunity to be freed from it.’॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)