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mahabharat 3.179.23: इस प्रकार मुझ पर हार्दिक दया होने के कारण मैंने उन दयालु महर्षियों की कही हुई बातें स्पष्ट रूप से सुन लीं। तत्पश्चात् वे सभी ब्रह्मर्षि अन्तर्धान हो गए॥23॥   |   mahabharat अध्याय 3.179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.179.23 
इति चाप्यहमश्रौषं वचस्तेषां दयावताम्।
मयि संजातहार्दानामथ तेऽन्तर्हिता द्विजा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मुझ पर हार्दिक दया होने के कारण मैंने उन दयालु महर्षियों की कही हुई बातें स्पष्ट रूप से सुन लीं। तत्पश्चात् वे सभी ब्रह्मर्षि अन्तर्धान हो गए॥23॥
 
In this way, due to feeling of heartfelt compassion towards me, I heard clearly what those compassionate Maharishis had said. After that all those Brahmarishis disappeared. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)