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mahabharat 3.179.20: 'उसके इतना कहते ही मैं ज़मीन पर गिर पड़ा। पर आज भी वो पुरानी याद मेरे दिल से नहीं गई। हालाँकि ये घटना बहुत पुरानी है, पर मुझे सब कुछ ज्यों का त्यों याद है।'   |   mahabharat अध्याय 3.179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.179.20 
ततोऽस्मि पतितो भूमौ न च मामजहात् स्मृति:।
स्मार्तमस्ति पुराणं मे यथैवाधिगतं तथा॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'उसके इतना कहते ही मैं ज़मीन पर गिर पड़ा। पर आज भी वो पुरानी याद मेरे दिल से नहीं गई। हालाँकि ये घटना बहुत पुरानी है, पर मुझे सब कुछ ज्यों का त्यों याद है।'
 
‘As soon as he said this I fell on the ground. But even today that old memory has not left me. Although this incident is very old, I remember everything as it happened.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)