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mahabharat 3.179.17: 'कौरवश्रेष्ठ! पशु-जगत में किसी साधारण सर्प ने तुम्हें नहीं पकड़ा है। किन्तु मुझे ऐसा वरदान प्राप्त है (इसीलिए मैं तुम्हें पकड़ सका हूँ)।   |   mahabharat अध्याय 3.179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.179.17 
नासि केवलसर्पेण तिर्यग्योनिषु वर्तता।
गृहीत: कौरवश्रेष्ठ वरदानमिदं मम॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'कौरवश्रेष्ठ! पशु-जगत में किसी साधारण सर्प ने तुम्हें नहीं पकड़ा है। किन्तु मुझे ऐसा वरदान प्राप्त है (इसीलिए मैं तुम्हें पकड़ सका हूँ)।
 
'Kauravashreshtha! You have not been caught by any ordinary snake in the animal world. But I have received such a boon (that is why I have been able to catch you).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)