vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज
»
श्लोक 16
श्लोक
3.179.16
न हि मे मुच्यते कश्चित् कथंचित् प्रग्रहं गत:।
गजो वा महिषो वापि षष्ठे काले नरोत्तम॥ १६॥
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! दिन के छठे भाग में चाहे भैंसा हो या हाथी, वह मेरे चंगुल से नहीं बच सकता॥16॥
'O best of men! During the sixth part of the day, no matter if it is a buffalo or an elephant, it cannot escape in my clutches.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×