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mahabharat 3.179.16: हे पुरुषश्रेष्ठ! दिन के छठे भाग में चाहे भैंसा हो या हाथी, वह मेरे चंगुल से नहीं बच सकता॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.179.16 
न हि मे मुच्यते कश्चित् कथंचित् प्रग्रहं गत:।
गजो वा महिषो वापि षष्ठे काले नरोत्तम॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! दिन के छठे भाग में चाहे भैंसा हो या हाथी, वह मेरे चंगुल से नहीं बच सकता॥16॥
 
'O best of men! During the sixth part of the day, no matter if it is a buffalo or an elephant, it cannot escape in my clutches.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)