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mahabharat 3.179.14: 'ब्राह्मणों का अनादर करने के कारण महर्षि अगस्त्य के शाप के कारण मैं इस अवस्था को प्राप्त हुआ हूँ। मेरी यह दुर्गति तुम अपनी आँखों से देखो।॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.179.14 
सोऽहं शापादगस्त्यस्य ब्राह्मणानवमन्य च।
इमामवस्थामापन्न: पश्य दैवमिदं मम॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'ब्राह्मणों का अनादर करने के कारण महर्षि अगस्त्य के शाप के कारण मैं इस अवस्था को प्राप्त हुआ हूँ। मेरी यह दुर्गति तुम अपनी आँखों से देखो।॥14॥
 
'I have reached this state due to the curse of Maharishi Agastya for disrespecting the Brahmins. See this misfortune of mine with your own eyes.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)