श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.179.12 
इमामवस्थां सम्प्राप्तो ह्यहं कोपान्मनीषिणाम्।
शापस्यान्तं परिप्रेप्सु: सर्वं तत् कथयामि ते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'मुनियों के क्रोध के कारण मेरी यह दशा हुई है और मैं इस शाप के निवारण की प्रतीक्षा में यहाँ रह रहा हूँ। इस शाप का कारण क्या है? यह सब मैं तुमसे कह रहा हूँ, सुनो॥12॥
 
'I have been reduced to this condition due to the anger of wise sages and I am staying here waiting for the removal of this curse. What is the reason for this curse? I am telling you all this, listen.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)