श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.179.11 
यथा त्विदं मया प्राप्तं सर्परूपमरिंदम।
तथावश्यं मया ख्याप्यं तवाद्य शृणु सत्तम॥ ११॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं का नाश करने वाले! आज मैं आपको यह अवश्य बताऊँगा कि मुझे यह सर्प शरीर किस प्रकार प्राप्त हुआ है। हे भद्र पुरुष! ध्यानपूर्वक सुनिए।
 
'Destroyer of enemies! Today I must tell you how I have received this body of a snake. O gentleman! Listen carefully.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)