श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 179: भीमसेन और सर्परूपधारी नहुषकी बातचीत, भीमसेनकी चिन्ता तथा युधिष्ठिरद्वारा भीमकी खोज  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.179.10 
दिष्टस्त्वं क्षुधितस्याद्य देवैर्भक्षो महाभुज।
दिष्टॺा कालस्य महत: प्रिया: प्राणा हि देहिनाम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'महाबाहो! मैं बहुत दिनों से भूखा था, आज सौभाग्य से देवताओं ने तुम्हें मेरे लिए भोजन के रूप में भेजा है। सभी प्राणियों को अपना प्राण प्रिय है॥10॥
 
'Mahabaho! I was hungry for a long time, today fortunately the gods have sent you as food for me. All living beings love their lives.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)