वैशम्पायनजी बोले - राजन्! महाधनुर्धर पाण्डव वृषपर्वा मुनि के आश्रम से आकर उस अनेक आश्चर्यों से युक्त द्वैतवन में निवास करते थे॥4॥
Vaishampayanji said – King! The fierce archers Pandavas, coming from the hermitage of king sage Vrishparva, lived in that Dwaitavan, full of many wonders. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥