श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 178: महाबली भीमसेनका हिंसक पशुओंको मारना और अजगरद्वारा पकड़ा जाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.178.33 
स हि प्रयत्नमकरोत् तीव्रमात्मविमोक्षणे।
न चैनमशकद् वीर: कथंचित् प्रतिबाधितुम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
उसने स्वयं को मुक्त करने के लिए बहुत प्रयास किए, लेकिन वीर भीमसेन किसी भी तरह से सर्प को हराने में सफल नहीं हुए।
 
He made great efforts to free himself, but the valiant Bhimasena was in no way successful in defeating the serpent.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि आजगरपर्वणि अजगरग्रहणे अष्टसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत आजगरपर्वमें भीमसेनका अजगरद्वारा ग्रहणसम्बन्धी

एक सौ अठहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)