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श्लोक 3.178.30  |
दशनागसहस्राणि धारयन्ति हि यद् बलम्।
तद् बलं भीमसेनस्य भुजयोरसमं परै:॥ ३०॥ |
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| अनुवाद |
| भीमसेन की भुजाओं में दस हजार हाथियों के बराबर बल था । उनका बल अन्यत्र कहीं भी नहीं था ॥30॥ |
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| Bhimasena's arms had as much strength as ten thousand elephants possess. His strength was unmatched anywhere else. ॥ 30॥ |
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