श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 178: महाबली भीमसेनका हिंसक पशुओंको मारना और अजगरद्वारा पकड़ा जाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.178.17 
वेगेन न्यपतद् भीमो निर्भयश्च पुन: पुन:।
आस्फोटयन् क्ष्वेडयंश्च तलतालांश्च वादयन्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वे बार-बार बड़े जोर से उछलते-कूदते, तालियाँ बजाते, तुरही बजाते और तालियाँ बजाते थे॥17॥
 
Again and again they jumped and leaped with great force, beating their rhythm, trumpeting and clapping their hands.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)