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mahabharat 3.178.16: वे पर्वत शिखरों को रौंदते, वृक्षों को तोड़कर इधर-उधर बिखेर देते और बिना किसी भय के अपनी गर्जना से पृथ्वी को गुंजायमान कर देते।   |   mahabharat अध्याय 3.178: महाबली भीमसेनका हिंसक पशुओंको मारना और अजगरद्वारा पकड़ा जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 178: महाबली भीमसेनका हिंसक पशुओंको मारना और अजगरद्वारा पकड़ा जाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.178.16 
पर्वताग्राणि वै मृद्नन्नादयानश्च विज्वर:।
प्रक्षिपन् पादपांश्चापि नादेनापूरयन् महीम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वे पर्वत शिखरों को रौंदते, वृक्षों को तोड़कर इधर-उधर बिखेर देते और बिना किसी भय के अपनी गर्जना से पृथ्वी को गुंजायमान कर देते।
 
They would trample the mountain peaks, break the trees and scatter them here and there and without any fear would make the earth resonate with their roar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)