श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 178: महाबली भीमसेनका हिंसक पशुओंको मारना और अजगरद्वारा पकड़ा जाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.178.10 
वनानि देवदारूणां मेघानामिव वागुरा:।
हरिचन्दनमिश्राणि तुङ्गकालीयकान्यपि॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ऊंचे देवदार के जंगल, चंदन, तुंग और कालियाक के वृक्ष ऐसे लग रहे थे मानो वे बादलों को पकड़ने के लिए जाल हों।
 
The tall deodar forests along with the sandalwood, tung and kaliyak trees looked as if they were traps to catch the clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)