Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.177.22: उन्हें द्वैतवन में आते देख, उस वन के निवासी उनके पास आए। वे सभी तप, संयम, सदाचार और ध्यान में लीन थे। उनके पास घास-फूस की चटाई, जल के घड़े, ओढ़ने के लिए कपड़ा और चक्की के पत्थर - बस यही सब कुछ था। | mahabharat अध्याय 3.177: पाण्डवोंका गन्धमादनसे बदरिकाश्रम, सुबाहुनगर और विशाखयूप वनमें होते हुए सरस्वती-तटवर्ती द्वैतवनमें प्रवेश । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन्हें द्वैतवन में आते देख, उस वन के निवासी उनके पास आए। वे सभी तप, संयम, सदाचार और ध्यान में लीन थे। उनके पास घास-फूस की चटाई, जल के घड़े, ओढ़ने के लिए कपड़ा और चक्की के पत्थर - बस यही सब कुछ था।
Seeing them coming to Dwaitvan, the residents of that forest came near to see them. All of them were devoted to austerity, self-control, good conduct and meditation. Straw mats, water pots, cloth to cover themselves and grinding stones – these were the only things they had.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥