Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.177.2: तत्पश्चात श्वेत मेघों के समान चमकने वाले कुबेर के प्रिय प्रदेश कैलाश को देखकर भरतकुलभूषण पाण्डु के पुत्रों को पुनः महान आनन्द हुआ।   |   mahabharat अध्याय 3.177: पाण्डवोंका गन्धमादनसे बदरिकाश्रम, सुबाहुनगर और विशाखयूप वनमें होते हुए सरस्वती-तटवर्ती द्वैतवनमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 177: पाण्डवोंका गन्धमादनसे बदरिकाश्रम, सुबाहुनगर और विशाखयूप वनमें होते हुए सरस्वती-तटवर्ती द्वैतवनमें प्रवेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.177.2 
ततस्तु तेषां पुनरेव हर्ष:
कैलासमालोक्य महान् बभूव।
कुबेरकान्तं भरतर्षभाणां
महीधरं वारिधरप्रकाशम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात श्वेत मेघों के समान चमकने वाले कुबेर के प्रिय प्रदेश कैलाश को देखकर भरतकुलभूषण पाण्डु के पुत्रों को पुनः महान आनन्द हुआ।
 
After that, seeing Kubera's favorite land Kailash, which was shining like white clouds, the sons of Bharatkulbhushan Pandu again felt great joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)