श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 177: पाण्डवोंका गन्धमादनसे बदरिकाश्रम, सुबाहुनगर और विशाखयूप वनमें होते हुए सरस्वती-तटवर्ती द्वैतवनमें प्रवेश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.177.11 
तत: क्रमेणोपययुर्नृवीरा
यथागतेनैव पथा समग्रा:।
विहृत्य मासं सुखिनो बदर्यां
किरातराज्ञो विषयं सुबाहो:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद सभी वीर योद्धा धीरे-धीरे उसी मार्ग से वापस चलने लगे, जिस मार्ग से वे आए थे। एक महीने तक बदरिकाश्रम में सुखपूर्वक रहने के बाद वे किरातराज सुबाहु के राज्य की ओर चल पड़े।
 
After this all the valiant warriors gradually started walking back the same route by which they had come. After living comfortably in Badarikashrama for a month they proceeded towards the kingdom of the King of Kiratas, Subahu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)