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श्लोक 3.176.23  |
तेनार्ष्टिषेणेन तथानुशिष्टा-
स्तीर्थानि रम्याणि तपोवनानि।
महान्ति चान्यानि सरांसि पार्था:
सम्पश्यमाना: प्रययुर्नराग्रॺा:॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| इसी प्रकार राजर्षि आर्ष्टिषेण ने भी उन सबको उपदेश दिया। तत्पश्चात् वे महान पाण्डव पवित्र तीर्थों, सुन्दर तीर्थों तथा अन्य बड़े-बड़े सरोवरों का भ्रमण करते हुए आगे बढ़े। 23॥ |
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| Similarly, Rajarshi Arshtishen also preached to all of them. After that, those great Pandavas proceeded ahead, visiting holy places of pilgrimage, beautiful shrines and other big lakes. 23॥ |
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इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि आजगरपर्वणि गन्धमादनप्रस्थाने षट्सप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत आजगरपर्वमें गन्धमादनसे प्रस्थानविषयक एक सौ छिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७६॥
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