श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 176: भीमसेनकी युधिष्ठिरसे बातचीत और पाण्डवोंका गन्धमादनसे प्रस्थान  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.176.20 
समाप्तकर्मा सहित: सुहृद्भि-
र्जित्वा सपत्नान् प्रतिलभ्य राज्यम्।
शैलेन्द्र भूयस्तपसे जितात्मा
द्रष्टा तवास्मीति मतिं चकार॥ २०॥
 
 
अनुवाद
‘शैलेन्द्र! अब मैं अपने मन और बुद्धि को वश में करके, शत्रुओं को परास्त करके तथा अपना खोया हुआ राज्य पुनः प्राप्त करके, अपने मित्रों के साथ अपने समस्त कार्य पूर्ण करके, फिर तपस्या हेतु लौटकर, आपसे मिलूँगा।’ इस प्रकार युधिष्ठिर ने निश्चय किया।
 
'Shailendra! Now, having controlled my mind and intellect, after defeating my enemies and regaining my lost kingdom, I will complete all my tasks with my friends and then return for penance, I will meet you.' Thus Yudhishthira decided.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd