श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 176: भीमसेनकी युधिष्ठिरसे बातचीत और पाण्डवोंका गन्धमादनसे प्रस्थान  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.176.1 
जनमेजय उवाच
तस्मिन् कृतास्त्रे रथिनां प्रवीरे
प्रत्यागते भवनाद् वृत्रहन्तु:।
अत: परं किमकुर्वन्त पार्था:
समेत्य शूरेण धनंजयेन॥ १॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - हे प्रभु! जब रथियों में श्रेष्ठ महाबली अर्जुन दिव्यास्त्रों का ज्ञान प्राप्त करके इन्द्र के महल से लौटे, तब उनसे मिलकर कुन्तीपुत्रों ने कौन-सा कार्य किया?॥1॥
 
Janamejaya asked - Lord! When the great Arjuna, the best among charioteers, returned from Indra's palace after acquiring knowledge of divine weapons, what task did the sons of Kunti perform after meeting him?॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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