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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 175: नारद आदिका अर्जुनको दिव्यास्त्रोंके प्रदर्शनसे रोकना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.175.2 
तत: संचोदयामास सोऽर्जुनं भ्रातृनन्दनम्।
दर्शयास्त्राणि कौन्तेय यैर्जिता दानवास्त्वया॥ २॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने अपने भाइयों को सुख पहुँचाने वाले अर्जुन को आदेश दिया- 'कुन्तीनन्दन! अब मुझे वे दिव्यास्त्र दिखाओ जिनसे तुमने दैत्यों पर विजय प्राप्त की है॥2॥
 
After that he ordered Arjun, who brings happiness to his brothers – 'Kuntinandan! Now show me those divine weapons with which you have conquered the demons. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)