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mahabharat 3.175.16: महाराज ! तत्पश्चात् वायुदेव पाण्डु नन्दन अर्जुन पर सब ओर से विचित्र सुगन्धित दिव्य मालाओं की वर्षा करने लगे ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.175: नारद आदिका अर्जुनको दिव्यास्त्रोंके प्रदर्शनसे रोकना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 175: नारद आदिका अर्जुनको दिव्यास्त्रोंके प्रदर्शनसे रोकना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.175.16 
ततो वायुर्महाराज दिव्यैर्माल्यै: सुगन्धिभि:।
अभित: पाण्डवं चित्रैरवचक्रे समन्तत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
महाराज ! तत्पश्चात् वायुदेव पाण्डु नन्दन अर्जुन पर सब ओर से विचित्र सुगन्धित दिव्य मालाओं की वर्षा करने लगे ॥16॥
 
Maharaj! Thereafter, Vayudev Pandu Nandan started showering strange fragrant divine garlands on Arjun from all sides. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)