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श्लोक 3.174.9  |
एवमिन्द्रस्य भवने पञ्च वर्षाणि भारत।
उषितानि मया राजन् स्मरता द्यूतजं कलिम्॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| हे भारत! इस प्रकार मैंने इन्द्र भवन में जुए के कारण हुए झगड़ों का स्मरण करते हुए पाँच वर्ष व्यतीत कर दिए हैं॥9॥ |
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| O Bharata! In this manner I have spent five years in the Indra Bhawan remembering the quarrels caused by gambling.॥ 9॥ |
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